नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में 28 फरवरी, 2026 को भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधि मामलों के विभाग की ओर से कानूनी वाद के कुशल और प्रभावी प्रबंधन पर एक सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। इसका विषय ‘विकसित भारत @2047 के लिए संस्थागत कानूनी वाद अधिकार को सुदृढ़ करना’ है। विधि एवं न्याय मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) उद्घाटन समारोह को संबोधित करेंगे और कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएंगे। भारत के अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल भी समारोह को संबोधित करेंगे।
यह सम्मेलन इस मान्यता पर आधारित है कि भारत सरकार से जुड़े कानूनी वाद केवल एक कानूनी कार्य नहीं है, बल्कि शासन का एक मूल तत्व है। इस सम्मेलन का उद्देश्य स्पष्ट अनुवर्ती (फॉलोअप) और समीक्षा तंत्र स्थापित करके समय-समय पर प्रगति का आकलन करने को बढ़ावा देना है। इसका अंतिम लक्ष्य कानूनी वाद अधिकार को एक मजबूत प्रशासनिक कार्य में बदलना है, जिससे लंबित मामलों में कमी आए, लागत दक्षता में वृद्धि हो और न्यायिक निर्णयों का कड़ाई से अनुपालन हो सके।
इसका उद्देश्य मंत्रालयों, विभागों और विधि अधिकारियों के बीच ‘कानूनी वाद के कुशल और प्रभावी प्रबंधन पर निर्देश, 2025’ पर एक आम सहमति विकसित करना है, जिसमें बार-बार होने वाली कानूनी वाद को कम करने, समय पर विवाद समाधान के लिए संस्थागत व्यवस्था को सुदृढ़ करने और विकसित भारत@2047 के दीर्घकालिक राष्ट्रीय परिकल्पना के अनुरूप निगरानी और प्रभावी निर्णय लेने के लिए एलआईएमबीएस सहित डिजिटल उपकरणों के जानकारीपूर्ण इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।

