प्रवासी ओड़िया स्वर्गीय प्रमोद साहू को अंतिम विदाई- (आईओएफ) की मानवीय पहल

भुवनेश्वर/सालेपुर :- सऊदी अरब में हृदयाघात से दिवंगत ४६ वर्षीय प्रवासी ओड़िया स्वर्गीय प्रमोद साहू का पार्थिव शरीर कई दिनों की के बाद ओडिशा पहुँचा। बीजू पटनायक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पर उनके पार्थिव शरीर के पहुँचते ही परिजनों की आँखें नम हो उठीं। वातावरण शोक और वेदना से भर गया।

इंटरनेशनल ओड़िया फाउंडेशन (आईओएफ) ने भारतीय दूतावास, कंपनी के एचआर विभाग और अन्य सहयोगियों के साथ समन्वय कर कानूनी एवं आर्थिक बाधाओं को पार किया। अथक प्रयासों के बाद स्वर्गीय प्रमोद साहू को सम्मानपूर्वक स्वदेश लाया गया।

फाउंडेशन के समर्पित संस्थापक कटक से सामाजिक कार्यकर्ता — रवि शंकर शर्मा, सऊदी अरब से उड़िया सामाजिक कार्यकर्ता बिस्वा रंजन साहू, प्रताप कुमार नायक और टूना साहू — ने इस कठिन समय में परिवार के साथ खड़े रहकर न केवल सहयोग दिया, बल्कि आशा और सम्मान भी प्रदान किया।

एक शोकाकुल परिजन ने भावुक स्वर में कहा:

“हम पूरी तरह असहाय और टूट चुके थे। उन्हें घर लाना असंभव लग रहा था। हम इंटरनेशनल ओड़िया फाउंडेशन, भारतीय दूतावास, स्थानीय सांसद कार्यालय के सहयोग से ”कंपनी के एचआर स्टाफ और उन सभी दयालु लोगों के सदैव आभारी रहेंगे, जिन्होंने हमारे सबसे कठिन समय में हमारा साथ दिया।”

फाउंडेशन के प्रतिनिधियों ने कहा, “कानूनी प्रक्रियाएँ अत्यंत जटिल और भावनात्मक रूप से थका देने वाली थीं। लेकिन अंततः मानवता की जीत हुई। इस परिवार के साथ खड़ा होना हमारा नैतिक कर्तव्य था।”

स्वर्गीय प्रमोद साहू का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गाँव कुलासमितांगा, किशोरनगर, सालिपुर, कटक में परिजनों, ग्रामीणों और शुभचिंतकों की उपस्थिति में नम आँखों से संपन्न हुआ। वे अपने पीछे पत्नी और एक बेटी को छोड़ गए हैं।

सरकार से विनम्र अपील, आईओएफ ने ओडिशा सरकार एवं भारत सरकार से संवेदनशील सहयोग की अपील की है:

प्रवासी ओड़िया परिवारों के लिए कल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत तत्काल आर्थिक सहायता।

उनकी पुत्री के लिए शैक्षिक प्रायोजन एवं छात्रवृत्ति। उनकी पत्नी के लिए स्थायी आजीविका सहायता। विदेशों में कार्यरत प्रवासी ओड़ियाओं की सुरक्षा हेतु नीतियों को और सशक्त बनाना।

स्वर्गीय प्रमोद साहू उन हज़ारों प्रवासी ओड़ियाओं में से एक थे, जो अपने परिवार के सपनों को साकार करने के लिए अपनी मिट्टी छोड़कर विदेश जाते हैं। उनका त्याग मौन में विलीन न हो जाए — उनकी पुत्री की शिक्षा और सफलता ही उनके परिश्रम और सपनों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

“वर्ष २०२० से” इंटरनेशनल ओड़िया फाउंडेशन २० से अधिक देशों में प्रवासी ओड़ियाओं की निस्वार्थ सेवा कर रहा है। हमारे लिए —“मानव सेवा ही ईश्वर सेवा है।”

 

 

 

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