ओडिशा का पहला श्रीरामचरितमानस सामूहिक पाठ आयोजित हुआ मारवाड़ी क्लब कटक में १९५० में – नन्द किशोर जोशी, एक्जिक्यूटिव एडिटर क्रांति ओडिशा मीडिया
ओडिशा प्रांत में सर्वप्रथम श्रीरामचरितमानस नवान्हपारायण सामूहिक पाठ का श्रीगणेश हुआ था मारवाड़ी क्लब माणिक घोष बाजार,कटक में १९५० में।भारत आजाद हुआ १९४७ में और श्रीरामचरितमानस नवान्हपारायण सामूहिक पाठ का शुभारंभ हुआ १९५० में, अर्थात आजादी मिलने के ३ साल पश्चात।
उस समय काशी के बड़े विद्वान,रामायणी पंडित शिवनारायण व्यास कटक पधारे थे। अपने जजमान के घर इंद्रचंद बथवाल के माणिक घोष बाजार निवास पर ठहरे थे।रामायणी , पंडित शिवनारायण व्यासजी ने जजमान के सामने इच्छा जाहिर की थी श्रीरामचरितमानस नवान्हपारायण पाठ के सामूहिक आयोजन की।
उस समय कटक के मारवाड़ी समाज के लोगों को श्रीरामचरितमानस नवान्हपारायण सामूहिक पाठ के बारे में कुछ भी जानकारी नहीं थी। अतः इंद्रचंद बथवाल ने रामायण विषय पर समाज के उस समय के गणमान्य व्यक्तियों से सलाह मशविरा किया।
सलाह मशविरा में विशिष्ट समाजसेवी मारवाड़ी लोग शामिल थे , वृद्धिचंद मोड़ा, बजरंग लाल चौखानी,प्रभुदयाल क्याल,शिव प्रसाद मोड़ा, गोविंद राम मोड़ा, बैजनाथ छापोलिया ,राधाकिशन भामी । इनके अलावा कुछ और लोग भी शामिल थे।
जब सभी ने सुना कटक में रामायण आयोजन की।सभी लोग खुशी से झूम उठे,खुशी से गदगद हुए। पंडित शिवनारायण व्यास जी से मार्ग दर्शन मांगा गया। इंद्रचंद बथवाल के आवास पर बैठक हुई थी।
व्यासजी ने विस्तार से नवान्हपारायण पाठ के आयोजन संबंधित सारी जानकारी दी, मार्ग दर्शन किया। सर्वप्रथम श्रीरामचरितमानस पुस्तकों की जरूरत पड़ी ।कटक में केवल एक ही पुस्तक गिरधारी लाल केडिया के घर में मिली।चूंकि सामूहिक पाठ के लिए अनेकों पुस्तकें जरुरी थी , अतः कोलकाता के गीता प्रेस गोरखपुर कार्यालय से बहुत सारी श्रीरामचरितमानस की पुस्तकें मंगाई गई।सारी पूजा की सामग्री इकट्ठी की गई।
पंडित शिवनारायण व्यास जी श्रीरामचरितमानस नवान्हपारायण पाठ के प्रथम व्यास जी बने । उन्हीं के श्रीमुख से सर्वप्रथम ओडिशा की धरती कटक शहर में सामूहिक रामायण पाठ का शुभारंभ हुआ।
यहां पाठ की शुरुआत से व्यवस्था रही है डबल पाठ करने की । मतलब एक बार एक दोहे को व्यासजी बोलेंगे, तत्पश्चात भक्त लोग बोलेंगे।ऐसी सुंदर परंपरा भारत में कम ही जगह देखने को मिलती है। क्रमशः


