ममता बनर्जी अभिषेक बनर्जी कुणाल घोष का जो वक्तव्य आता है, वह अभिमान से भरा होता है। हम बीजेपी को ३० सिट पर पहुचा देंगे। हमारी २६० से अधिक सीट आएगी। कहते है २०२६ भी २०२१ की तरह रहेगा। ममता का एक ही सिद्धांत है। विपक्ष की गाड़ी तोड़ दो विपक्षी उम्मीदवारी पर हमला कर घायल कर दो। पुलिस तो टीएमसी की गुलाम है।
वह कभी ममता के गुंडों को गिरफ्तार नहीं करेगी। इससे विपक्षी उम्मीदवार का कार्यकर्ता डरकर घर में बैठ जाता है। सोचता है जब बीजेपी उम्मीदवार सुरक्षित नहीं है, तब हम कहा सुरक्षित रहेंगे। यहाँ तक की बीजेपी के सर्व भारतीय अध्यक्ष नड्डा का भी को अभिषेक के इलाके में यह हाल करती है।
निर्लज्ज सौग़ात राय कहते हैं नड्डा पर हमला हुआ तो क्या ग़लत हुआ।
मैं १९६७ से छात्र परिषद की राजनीति करता हूँ। जादवपुर यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन का महामंत्री था। यह वही सौगात राय है, जब बंगाल में छात्र परिषद छात्र परिषद का महामंत्री था, बंगाल छोड़ कर स्टेट बैंक की नौकरी करने बंगाल से बाहर चला गया। यहाँ छात्र परिषद की लड़ाई सुब्रत मुखर्जी व कुमुद भट्टाचार्यने १८७१ में बिजय सिंह नाहर ने काँग्रेस की सरकार बना दी। पश्चिम बंगाल में वाप एस आ गई। प्रिय रंजन दस मुंशी की मदद से प्रदेश कांग्रेस सचिव बन गया। फिर सिद्धार्थ शंकर राय का चमचा बनकर बैरक पुर का कांग्रेस का टिकट पा कर जबरदस्त रिगिंग कर जीत गया। फिर केंद्र में चरण सिंह सरकार में मंत्री बन गया।
फिर प्रिय डा का चमचा बनकर एक सिटिं विधायक की हटाकर विधायक बना पिछले चुनाव में। वीजेपी को पावर में आने से मानताओ रोक नहीं सकती थी। प्रशांत किशोर ने बीजेपी का नारा सोनार बंगला के सामने बंगाल की बेटी ममता बनाम गुजराती मोदी बना दिया। लोक सभा चुनाव में बीजेपी को १८ संसद सदस्य नीले ममता को २२ व कांग्रेस को २संसद सदस्य मिले। बीजेपी को १२७ बिधानसभा क्षेत्र में बढ़त मिली। ममता को १६ बिधान सभा क्षेत्र में सफलता मिली। कांग्रेस को २२ बिधान सभा क्षेत्र में बड़त मिली। ममता का काम के गया। बीजेपी ने कहा १८० सीट पाने की आशा में थी। वह १२७ सिट भी नहीं पास की मात्र ७७ सीट पायी। ममता ने मुसलमानो को डराया। बीजेपी जीत गई तो एनआरसी लागू कर देगी। कांग्रेस को मिलने वाले सारे ५५ लाख मुस्लिम वोट ममता को मिल गए। उसे १६१ की बजाय २११ सीट मिल गई। उसका वोट ४४ प्रतिशत से बढ़कर ४८ प्रतिशत ही गया बीजेपी का वोट ४० प्रतिशत से घट कर ३८ प्रतिशत पर पहुँच गया। लोकनसभा चुनावी में जो ४० – ४४ पर था, वो बिधान सभा चुनाव में ३८ – ४८ प्रतिशत पर पहुँच गया।
२०२४ के लोक सभा चुनाव में यह १० प्रतिशत से घट कर ७ प्रतिशत पर आ गया। लोक सभा की बिधान सभा की १० सीट की बजाय १२ सीटमिली। बीजेपी को ९१ बिधान सभा क्षेत्री में बढ़त मिली। जबकि २०२१ में सिर्फ ७७ सीट मिली। यानी ममता के इतने अत्याचार के बावजूद दो संसद सदस्य बढ़े। १४ बिधायक बढ़े वोट का अन्तर अंतर घटा। ममता जेपी के इस नव विकाश को नहीं समझ रही है। वह समझती है कि पहले की तरह मार पीट करके बीजेपी को हरा दूँगी। बीजेपी ममता की इस चाल का तोड़ लगा लिया है। ब्लॉक स्तर पर जुलूस निकाल रही है जनतउसे अच्छा समर्थन मिल रहा है। ममता के गुंडे बीजेपी का कुछ नहीं बिगाड सकते क्योंकि जनता बीजेपी केसाथ रास्ते पर उतर गई गई है। इस बार बंगाल की लड़ाई ७० बनाम ३० की होगी। ममता१९९ का अंक भी पार नहीं कर पाएगी। २६० पाना तो दूर १०० सीट भी नहीं पा सकेगी। इस बार लड़ाई बंगाल की बेटी ममता बनाम गुजराती मोदी नहीं रहेगी। इस बार लड़ाई ममता का सिंडिकेट भ्रष्ट रह बनाम मोदी का उन्नयन घुस पैठिया मुक्त बंगाल होगा।

