मालेगांव बम विस्फोट प्रकरण में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) की विशेष अदालत द्वारा आज सभी आरोपियों को निर्दोष मुक्त किए जाने के बाद, तथाकथित ‘हिंदू आतंकवाद’ या ‘भगवा आतंकवाद’ के नाम पर रचा गया घिनौना काँग्रेसी षड्यंत्र आखिरकार उजागर हो गया है। केवल ‘हिंदू’ होने के कारण, राष्ट्रभक्त साध्वी प्रज्ञासिंह ठाकुर, कर्नल पुरोहित, मेजर उपाध्याय, सुधाकर चतुर्वेदी, समीर कुलकर्णी और अजय राहिरकर जैसे अनेक निर्दोषों को वर्षों तक जेल में डाला गया। उनका अमानवीय मानसिक और शारीरिक शोषण किया गया। यह केवल उनके विरुद्ध नहीं, बल्कि संपूर्ण हिंदू समाज को बदनाम करने की एक गहरी साजिश थी। इसलिए अब इस प्रकरण को यहीं समाप्त नहीं किया जा सकता; हिंदुओं को आतंकवादी ठहराने की साजिश रचनेवालों को कठोर दंड मिलना ही चाहिए, ऐसी मांग हिंदू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री रमेश शिंदे ने इस ऐतिहासिक निर्णय के बाद की है।
श्री रमेश शिंदे ने आगे कहा कि, मालेगांव प्रकरण में ‘हिंदू आतंकवाद’ शब्द का प्रयोग करनेवाले तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री सुशीलकुमार शिंदे ने बाद में यह स्वीकार किया था कि वह एक भूल थी। परंतु उन्होंने यह शब्द किसके कहने पर इस्तेमाल किया था? हिंदुओं को बदनाम करने के पीछे किसका षड्यंत्र था? उन सूत्रधारों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अमेरिका के राजदूत के समक्ष कहा था कि ‘‘भारत में हिंदू आतंकवाद, पाकिस्तान के इस्लामिक आतंकवाद से बड़ी समस्या है ।’’ यह बात विकीलीक्स के माध्यम से सामने आई थी। हिंदू समाज को बदनाम करनेवाले, निर्दोष राष्ट्रभक्तों को फँसानेवाले, और जांच के नाम पर अत्याचार करनेवाले सभी दोषियों को ढूँढकर उन्हें कठोरतम दंड देना ही सच्चा न्याय होगा!

