प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘मन की बात’ सीखने, प्रेरणा और पर्यावरण से जुड़ी चेतना का प्रतीक है: सर्बानंद सोनोवाल

केन्द्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम के नवीनतम संस्करण की हार्दिक सराहना की और इसे प्रेरणा एवं शिक्षा का एक ऐसा अद्भुत मंच बताया जो भारत की राष्ट्र निर्माण की जीवंत भावना तथा पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता का उत्सव मनाता है।

प्रधानमंत्री के संबोधन के बारे में बोलते हुए, सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “’मन की बात’ देश के कोने-कोने से प्रेरक कहानियों और परिवर्तनकारी पहलों को प्रकाश में लाता है। यह एक ऐसे अत्यंत समृद्ध कार्यक्रम के रूप में विकसित हुआ है जो न केवल व्यक्ति को शिक्षित करता है बल्कि उसका उत्थान भी करता है।”

प्रसारण के गहन प्रभाव के बारे में बताते हुए, सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की वैश्विक प्रतिष्ठा और लोगों के साथ उनके गहरे जुड़ाव को देखते हुए, ‘मन की बात’ एक ऐसे शक्तिशाली माध्यम के रूप में कार्य करता है जो नागरिकों को सीधे उनकी बात सुनने और एक मजबूत एवं अपेक्षाकृत अधिक एकजुट भारत के निर्माण के लिए प्रेरित होने का अवसर प्रदान करता है।”

सोनोवाल ने नवीनतम एपिसोड में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान पर दिए गए जोर की विशेष रूप से सराहना की। “प्रधानमंत्री द्वारा गैंडों से परे जाकर काजीरंगा की समृद्ध पक्षी संबंधी जैव विविधता का उल्लेख असम और पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए अत्यंत गौरव की बात है। यह सुनकर बहुत खुशी हुई कि उन्होंने पहली बार घास के मैदान में रहने वाले पक्षियों की गणना (ग्रासलैंड बर्ड सेंसस) और इकोलॉजी के संरक्षण के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसी तकनीक के रचनात्मक उपयोग पर प्रकाश डाला।”

अपने प्रसारण में, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा, “भले ही काजीरंगा अपने गैंडों के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन इस बार चर्चा का विषय इसके घास के मैदान और उनमें रहने वाले पक्षी हैं। पहली बार, यहां ‘ग्रासलैंड बर्ड सेंसस’ आयोजित की गई है, जिसमें पक्षियों की 40 से अधिक प्रजातियों की पहचान की गई है। इनमें कई दुर्लभ प्रजातियां भी शामिल हैं। इसमें तकनीक ने अद्भुत काम किया है। ध्वनि रिकॉर्डिंग उपकरणों का उपयोग किया गया और एआई की मदद से पक्षियों को बिना छेड़े उनकी पहचान की गई। जब तकनीक और संवेदनशीलता एक साथ आती हैं, तो प्रकृति को गहराई से समझना बहुत आसान हो जाता है।”

इसी भावना को दोहराते हुए, सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “इस तरह की पहल मानवता और प्रकृति के बीच स्थायी सह-अस्तित्व का मार्ग दिखाती हैं। पर्यावरण के मामले में करुणा के साथ नवाचार को मिलाने का प्रधानमंत्री का दृष्टिकोण हम सभी के लिए एक सबक और अगली पीढ़ी के लिए एक प्रेरणास्रोत है।”

केन्द्रीय मंत्री ने दोहराया कि ‘मन की बात’ एक ऐसे मार्गदर्शक प्रकाश की तरह है, जो जागरूकता, प्रेरणा और सामूहिक राष्ट्रीय गौरव की संस्कृति को बढ़ावा देता है। सोनोवाल ने भाजपा सदस्यों, सरकारी अधिकारियों और आम जनता के साथ यहां अपने आवास से इस कार्यक्रम को सुना।

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