नई दिल्ली, अजय बक्शी, राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग में कार्यरत थे। उन्होंने लगभग बीस वर्षों तक वहां कार्य किया। गत 15/7/2025 को उनका निधन हो गया। बक्शी जी की इच्छा अनुसार उनका पार्थिव शरीर पीजीआई चंडीगढ़ के एनाटॉमी विभाग को चिकित्सा, शिक्षा एवं अनुसंधान के लिए दान दे दिया गया। उनकी पत्नी श्रीमती सुनीता, बेटा सिद्धार्थ और बेटी आकांक्षा ने उनके इस उदार निर्णय का सम्मान किया। एनाटॉमी विभाग के प्रमुख ने भी उनके इस कार्य के लिए आभार तथा परिवार के साथ अपनी संवेदनाएं प्रकट की। अंगदान या देहदान आज के युग की आवश्यकता है। इससे चिकित्सा जगत को बहुत सहायता मिलती है
अजय बख्शी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए निवर्तमान ज्वाइंट रजिस्टर (लॉ) राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग अनिल कुमार परासर ने कहा कि बख्शी विलक्षण व्यक्तित्व के धनी थे। उनकी ईमानदारी, साहस, करुणा और दृढ़ व्यावसायिकता, गहरी मानवता से प्रेरित जीवन की पहचान थे। उन्होंने न केवल दृढ़ विश्वास के साथ, बल्कि दयालुता और शालीनता के साथ भी जीवनयापन किया। बख्शी जी एक महा मानव थे उन्होंने अपना सारा जीवन मानव सेवा में लगा दिया और मृत्यु के बाद भी अपना शरीर मानव जीवन के कल्याण के लिए समर्पित कर दिया।
सचमुच में देहदान महादान है!

