महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय’ द्वारा पुतर्गाल की अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक परिषद में ‘मानसिक शांति’ विषय पर शोध प्रस्तुत

नामजप और स्वभावदोष निर्मूलन के कारण आनंदप्राप्ति होती है !

प्रत्येक व्यक्ति आनंद और मानसिक शांति की खोज में रहता है; परंतु जीवन की विविध समस्याओं का सामना करते हुए वह आनंद और मानसिक शांति गवां देता है । वृद्धावस्था में शारीरिक वेदनाओं के साथ ही व्यक्ति को विविध प्रकार के भय का भी सामना करना पडता है । नामजप और स्वभावदोष-अहं निर्मूलन को जीवन का भाग बनाने पर सर्वोच्च एवं निरंतर सुख अर्थात आनंद तथा मानसिक शांति की प्राप्ति हो सकती है, ऐसा प्रतिपादन महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय के श्री. मिलूटिन पेनक्रेट्स ने किया । वे 28 मई को लिस्बन, पुतर्गाल में हो रही ‘7 वीं यूरोपियन कॉन्फ्रेन्स ऑन रिलिजन, स्पिरिच्युआलिटी एन्ड हेल्थ एजिंग, स्पिरिच्युआलिटी एन्ड हेल्थ’ इस अंतरराष्ट्रीय परिषद को संबोधित कर रहे थे । इस परिषद का आयोजन ‘यूरोपियन इनिशिएटिव ऑन रिलिजन, स्पिरिच्युआलिटी एन्ड हेल्थ एन्ड दी कैथॉलिक युनिवर्सिटी ऑफ पुतर्गाल’ ने किया था । श्री. मिलूटिन पेनक्रेट्स ने इस परिषद में *’वृद्धावस्था में व्यक्ति को मानसिक शांति मिलने के लिए सहायता’, यह शोधनिबंध प्रस्तुत किया । महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय के संस्थापक परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी इस शोधनिबंध के लेखक तथा श्री. शॉन क्लार्क सहलेखक हैं ।

महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय द्वारा वैज्ञानिक परिषदों में प्रस्तुत किया गया यह 71 वां शोधनिबंध था । इसके पूर्व 15 राष्ट्रीय और 54 अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक परिषदों में शोध निबंध प्रस्तुत किए गए हैं । इनमें से 4 अंतरराष्ट्रीय परिषदों में विश्‍वविद्यालय ने ‘सर्वश्रेष्ठ शोधनिबंध’ पुरस्कार प्राप्त किए हैं ।

श्री. मिलूटिन पेनक्रेट्स ने आगे कहा कि, जीवन की समस्याओं के कारण हम दुःखी होते है, जिससे स्वयं की मानसिक शांति और सुख पर नकारात्मक परिणाम होता है । हमारे जीवन की समस्याओं के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक ये 3 मूल कारण हैं । जीवन की 50 प्रतिशत से अधिक समस्याओं का कारण आध्यात्मिक होता है; परंतु वह शारीरिक अथवा मानसिक समस्याओं के स्वरूप में प्रकट हो सकता है । यह प्रतिशत आध्यात्मिक शोध से प्राप्त हुए हैं । प्रारब्ध, पूर्वजों के अतृप्त लिंगदेह और सूक्ष्म स्तरीय अनिष्ट शक्तियां, ये 3 प्रमुख आध्यात्मिक कारण हैं । समस्या के निवारण हेतु समस्या के मूल कारण के स्तरानुसार उपाय करना होता है । जब किसी समस्या का मूल कारण आध्यात्मिक हो, तब आध्यात्मिक समाधान योजना करना आवश्यक होता है । आध्यात्मिक उपचारों से शारीरिक और मानसिक समस्याओं में भी सहायता होती है, विशेषतः जब इन समस्याओं का मूल कारण आध्यात्मिक हो ।

श्री. मिलूटिन पेनक्रेट्स ने आनंदप्राप्ति और मानसिक शांति हेतु तीन प्रमुख प्रयास बताए

1. नामजप :* प्रत्येक व्यक्ति अपने धर्मानुसार नामजप कर सकता है । वर्तमान काल में ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ।’, यह एक अत्यंत उपयुक्त नामजप है ।

2. संरक्षक नामजप :* ‘श्री गुरुदेव दत्त’ यह जप पूर्वजों के कष्ट से रक्षा करता है । वृद्ध व्यक्ति को प्रत्यक्ष जप करना संभव न हो, तो उसके निकट ऑडियो लगाकर रख सकते हैं ।

3. स्वभावदोष निर्मलन प्रक्रिया :* इससे मन से स्वभावदोष के संस्कार नष्ट हो सकते हैं ।

इस प्रकार व्यक्ति लगन से साधना के प्रयास करे, तो उसे अत्यधिक लाभ होकर प्रतिकूल स्थिति में भी मानसिकशांति मिल सकती है । वृद्धावस्था में मानसिक शांति प्राप्त हो, इस हेतु शीघ्रातिशीघ्र साधना आरंभ करें ।

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